Sad Poetry About Love
प्यार एक गहरा और खुशनुमा एहसास है। जब किसी से प्यार होने लगता है तो रिश्ते की शुरवात में हम अक्सर
सिर्फ सकारात्मक चीज़ें ही देखते हैं, और सातवे आसमान में महसूस करते हैं। ये एहसास इतना गहरा होता है
की यदि हमें उस व्यक्ति से बदले में उतना ही प्यार न मिले तो काफी दुःख पहुँचता है।
उस रात मेरी आँख से एक भी कतरा आँसु का नहीं गिरा था
अस्को का समंदर था शायद मगर वो अंदर ही सूखः गया था
वो जाती रही निकल कर मेरे जिस्म से रूह की तरह
और में लाश की तरह रहा बेजान सा पड़ा
उसने जाते हुए ना कोई गिला ना शिकायत की थी
मेरे बाद भी तुम खुश रहना बहते आँखों को
पूछ कर मुझसे ये कसम ली थी
सीने से लगा कर बोली की मैं जानती हूँ तुम
समझते हो बहुत अच्छे से मेरे सब हालातो को
मगर अंदर ही अंदर टूट रहे हो मेरी ख़ुशी
के लिए मान गए मेरी बातो को
कहाँ की कसम है मेरी तुम्हे अपना ध्यान
अच्छे से रखते हुए तुम्हे सारा जीवन जीना होगा
सब कुछ भूल कर एक नई राह को चुन कर
तुम्हे ख़ुशियाँ का प्याला पीना होगा
अस्को का समंदर था शायद मगर वो अंदर ही सूखः गया था
वो जाती रही निकल कर मेरे जिस्म से रूह की तरह
और में लाश की तरह रहा बेजान सा पड़ा
उसने जाते हुए ना कोई गिला ना शिकायत की थी
मेरे बाद भी तुम खुश रहना बहते आँखों को
पूछ कर मुझसे ये कसम ली थी
सीने से लगा कर बोली की मैं जानती हूँ तुम
समझते हो बहुत अच्छे से मेरे सब हालातो को
मगर अंदर ही अंदर टूट रहे हो मेरी ख़ुशी
के लिए मान गए मेरी बातो को
कहाँ की कसम है मेरी तुम्हे अपना ध्यान
अच्छे से रखते हुए तुम्हे सारा जीवन जीना होगा
सब कुछ भूल कर एक नई राह को चुन कर
तुम्हे ख़ुशियाँ का प्याला पीना होगा
और कहा की खबरदार जो तुम शराब को हाथ भी लगाओगे
अगर पी तुमने शराब तो मुझे खुश कभी खुश नहीं देख पाओगे
मैंने रब की मंजिल मानी और उसकी ख़ुशी के लिए
उसे जाने दिया
वो रोता देख कर अन्दर से टूट ना जाये
इसलिए चेहरे पर एक सिस्क तक ना आने दिया
उसके जाते ही आँखों का समंदर कुछ इस तरह से
उमड़ पड़ा था की मातम की चादर में लिपट गया था मैं
जो उस वक्त एकदम चुपचाप सा खड़ा था
वो रात रातभर जगती रही थी मेरे साथ मुझे
दिलाशा देने के लिए
वो जानती थी की मैंने उसके बिन जी नहीं पाउँगा
मगर वो कभी ना लौटी मेरी सुध बुध लेने के लिए
मैंने खुद को अपने कमरे में समेट कर रख लिया था
मर तो मैं कब का गया था मगर कभी ना मरूंगा
खुद को मैंने उससे ये वादा किया था
अगर पी तुमने शराब तो मुझे खुश कभी खुश नहीं देख पाओगे
मैंने रब की मंजिल मानी और उसकी ख़ुशी के लिए
उसे जाने दिया
वो रोता देख कर अन्दर से टूट ना जाये
इसलिए चेहरे पर एक सिस्क तक ना आने दिया
उसके जाते ही आँखों का समंदर कुछ इस तरह से
उमड़ पड़ा था की मातम की चादर में लिपट गया था मैं
जो उस वक्त एकदम चुपचाप सा खड़ा था
वो रात रातभर जगती रही थी मेरे साथ मुझे
दिलाशा देने के लिए
वो जानती थी की मैंने उसके बिन जी नहीं पाउँगा
मगर वो कभी ना लौटी मेरी सुध बुध लेने के लिए
मैंने खुद को अपने कमरे में समेट कर रख लिया था
मर तो मैं कब का गया था मगर कभी ना मरूंगा
खुद को मैंने उससे ये वादा किया था
अब में जीता हु तो बस अपना वदा निभानें के लिए
वैसे भी हम जिए भी तो बताओ किसके लिए
वो थी तो खुशियाँ थी मेरी
मैंने उसे देख कर तो हँसना सीखा था
मेरी किस्मत भी बड़ी अजीब सी रही जिसने दी
जिंदगी मुझे शायद उसी के हाथो मेरा मरना भी लिखा था
मगर आज जब सुना की वो भी मेरे गम में
जिंदगी का बोझ उठा ना सकी
वैसे भी हम जिए भी तो बताओ किसके लिए
वो थी तो खुशियाँ थी मेरी
मैंने उसे देख कर तो हँसना सीखा था
मेरी किस्मत भी बड़ी अजीब सी रही जिसने दी
जिंदगी मुझे शायद उसी के हाथो मेरा मरना भी लिखा था
मगर आज जब सुना की वो भी मेरे गम में
जिंदगी का बोझ उठा ना सकी
मजबूरियाँ का भार धोते - धोते खुद को
जिन्दा बचा ना सकी
अब अगर वो चली गयी भला वादा भी
कैसे निभा पाऊँगा मैं
वो किसी मज़बूरी में छोड़कर चली गयी थी मुझे
यही पूछने उसके पास जाऊँगा मैं
Lc RJ Kotri Post By लालचन्द वर्मा
जिन्दा बचा ना सकी
अब अगर वो चली गयी भला वादा भी
कैसे निभा पाऊँगा मैं
वो किसी मज़बूरी में छोड़कर चली गयी थी मुझे
यही पूछने उसके पास जाऊँगा मैं
Lc RJ Kotri Post By लालचन्द वर्मा








Really Ture Love Poetry
ReplyDeleteSupar LIne Ji Really Ture Line its Amezing
ReplyDeleteWa Re Mere Bhai Apane Dard Ki Wajah Se Kisi Dusre Ka Dard Kyo Yad Dila Rhe Ho
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