Sad Poetry About Love
अस्को का समंदर था शायद मगर वो अंदर ही सूखः गया था
वो जाती रही निकल कर मेरे जिस्म से रूह की तरह
और में लाश की तरह रहा बेजान सा पड़ा
उसने जाते हुए ना कोई गिला ना शिकायत की थी
मेरे बाद भी तुम खुश रहना बहते आँखों को
पूछ कर मुझसे ये कसम ली थी
सीने से लगा कर बोली की मैं जानती हूँ तुम
समझते हो बहुत अच्छे से मेरे सब हालातो को
मगर अंदर ही अंदर टूट रहे हो मेरी ख़ुशी
के लिए मान गए मेरी बातो को
कहाँ की कसम है मेरी तुम्हे अपना ध्यान
अच्छे से रखते हुए तुम्हे सारा जीवन जीना होगा
सब कुछ भूल कर एक नई राह को चुन कर
तुम्हे ख़ुशियाँ का प्याला पीना होगा
अगर पी तुमने शराब तो मुझे खुश कभी खुश नहीं देख पाओगे
मैंने रब की मंजिल मानी और उसकी ख़ुशी के लिए
उसे जाने दिया
वो रोता देख कर अन्दर से टूट ना जाये
इसलिए चेहरे पर एक सिस्क तक ना आने दिया
उसके जाते ही आँखों का समंदर कुछ इस तरह से
उमड़ पड़ा था की मातम की चादर में लिपट गया था मैं
जो उस वक्त एकदम चुपचाप सा खड़ा था
वो रात रातभर जगती रही थी मेरे साथ मुझे
दिलाशा देने के लिए
वो जानती थी की मैंने उसके बिन जी नहीं पाउँगा
मगर वो कभी ना लौटी मेरी सुध बुध लेने के लिए
मैंने खुद को अपने कमरे में समेट कर रख लिया था
मर तो मैं कब का गया था मगर कभी ना मरूंगा
खुद को मैंने उससे ये वादा किया था
वैसे भी हम जिए भी तो बताओ किसके लिए
वो थी तो खुशियाँ थी मेरी
मैंने उसे देख कर तो हँसना सीखा था
मेरी किस्मत भी बड़ी अजीब सी रही जिसने दी
जिंदगी मुझे शायद उसी के हाथो मेरा मरना भी लिखा था
मगर आज जब सुना की वो भी मेरे गम में
जिंदगी का बोझ उठा ना सकी
जिन्दा बचा ना सकी
अब अगर वो चली गयी भला वादा भी
कैसे निभा पाऊँगा मैं
वो किसी मज़बूरी में छोड़कर चली गयी थी मुझे
यही पूछने उसके पास जाऊँगा मैं
Lc RJ Kotri Post By लालचन्द वर्मा



















